सजा दो मन को मधुबन सा मेरे गणराज आये है लिरिक्स

गणेश भजन सजा दो मन को मधुबन सा मेरे गणराज आये है लिरिक्स
गायक – जगदीश विश्वकर्मा।
तर्ज़ – सजादो घर को गुलशन सा।

सजा दो मन को मधुबन सा,
मेरे गणराज आये है,
लगे हर गुल भी गुलशन सा,
मेरे गणराज आये है।।

सुदी भादों चतुर्थी को,
झुलावे गौरा गणपति को,
चमन महकेगा चन्दन सा,
मेरे गणराज आये है।।

है माता गौरा कल्याणी,
पिता है भोले वरदानी,
ललन है अलख निरंजन सा,
मेरे गणराज आये है।।

है दाता रिद्धि सिद्धि के,
है दाता ज्ञान बुद्धि के,
‘पदम्’ सेवक है निर्गुण सा,
मेरे गणराज आये है।।

सजा दो मन को मधुबन सा,
मेरे गणराज आये है,
लगे हर गुल भी गुलशन सा,
मेरे गणराज आये है।।

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