सच्चे मन से माँ की ज्योत तुम जगाओ भजन लिरिक्स

सच्चे मन से माँ की,
ज्योत तुम जगाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।।

ये ही है दुर्गा ये ही माँ काली,
चाहे किसी भी रूप में मनाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।
सच्चे मन से मां की,
ज्योत तुम जगाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।।

धन यश सुख सब देने वाली,
माँ से भंडार तुम भरवाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।
सच्चे मन से मां की,
ज्योत तुम जगाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।।

तन मन करदो माँ को समर्पण,
शेर चरणों में शीश तुम नवाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।
सच्चे मन से मां की,
ज्योत तुम जगाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।।

जगदाति की कर लो पूजा,
बस दाती के ही हो जाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।
सच्चे मन से मां की,
ज्योत तुम जगाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।।

सच्चे मन से माँ की,
ज्योत तुम जगाओ,
बिन मांगे सारे फल पाओ।।

दुर्गा माँ भजन सच्चे मन से माँ की ज्योत तुम जगाओ भजन लिरिक्स
सच्चे मन से माँ की ज्योत तुम जगाओ भजन लिरिक्स
तर्ज – म्हारा कीर्तन में।
Singer – Mukesh Kumar

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