मात पिता से दगो जो करेगो चार जनम पछतावेगो भजन

राजस्थानी भजन मात पिता से दगो जो करेगो चार जनम पछतावेगो भजन

मात पिता से दगो जो करेगो,
चार जनम पछतावेगो,
पछतावेगो दुःख पावैगो,
पछतावेगो दुःख पावैगो,
बीरा म्हारा यो अवसर नहीं आवेगों,
मात पिता से दगो जो करैगो,
चार जनम पछतावेगो।।

पहला जनम में बनेगो रे बेल तु,
पकड़ किसान लै जावेगो,
नाक के अंदर नाथ पहरायेगो,
और परहाना से मारेगो,
मारेगो सुधारेगो,
बीरा म्हारा यो अवसर नहीं आवेगों,
मात पिता से दगो जो करैगो,
चार जनम पछतावेगो।।

दूसरा जनम में बनेगो रे गधड़ो,
पकड़ कुम्हार लै जावेगो,
कांधा के ऊपर कुंठा धरेगो,
और डंडा से मारेगो,
मारेगो सुधारेगो,
बीरा म्हारा यो अवसर नहीं आवेगों,
मात पिता से दगो जो करैगो,
चार जनम पछतावेगो।।

तीसरा जनम में बनेगो रे बांदरो,
पकड़ मदारी ले जायेगो,
गला के ऊपर रस्सी पहरायेगो,
घर घर भीख मंगायेगो,
बीरा म्हारा यो अवसर नहीं आवेगों,
मात पिता से दगो जो करैगो,
चार जनम पछतावेगो।।

चौथा जन्म में बनेगो रे बकरो,
पकड़ कसाई लै जायेगो,
गला के ऊपर छुर्री धरेगो,
मै मै करी ने तु तो मर जावेगो,
बीरा म्हारा यो अवसर नहीं आवेगों,
मात पिता से दगो जो करैगो,
चार जनम पछतावेगो।।

मात पिता से दगो जो करेगो,
चार जनम पछतावेगो,
पछतावेगो दुःख पावैगो,
पछतावेगो दुःख पावैगो,
बीरा म्हारा यो अवसर नहीं आवेगों,
मात पिता से दगो जो करैगो,
चार जनम पछतावेगो।।

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