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मनवा रे अब मान ले कहना भजन लिरिक्स

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गुरुदेव भजन मनवा रे अब मान ले कहना भजन लिरिक्स
तर्ज – चँदा रे मेरे भइया से।

मनवा रे अब मान ले कहना,
दिन और बचे न,
काहे न भजन करे हो।।

ये जीवन पानी का रैला,
ये तन है माटी का ढैला,
चार दिनो का है ये मैला,
पल का नही है ठिकाना,
काहे न भजन करे,
मनवा रै अब मान ले कहना,
दिन और बचे न,
काहे न भजन करे हो।।

नाम हरि का मन तू भजले,
गुरूवाणी पे अमल तू करले,
घर ये किराए का है पगले,
इसमे सदा नही रहना,
काहे न भजन करे,
मनवा रै अब मान ले कहना,
दिन और बचे न,
काहे न भजन करे हो।।

गूरु चरणो मे ध्यान लगालै,
तेरे अँग सँग है नँगली वाले,
आज तू अपना भाग्य जगाले,
सोते ही न रहना,
काहे न भजन करे,
मनवा रै अब मान ले कहना,
दिन और बचे न,
काहे न भजन करे हो।।

मनवा रे अब मान ले कहना,
दिन और बचे न,
काहे न भजन करे हो।।

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