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भूल आई म्हारा कान्हा जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी राजस्थानी भजन लिरिक्स

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भूल आई म्हारा कान्हा,
जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी,
ओढ़नी जी ओढ़नी जी,
ओढ़नी जी कान्हा ओढ़नी,
भूल्याई मारा कान्हा,
जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी।।

हे मारा पीर की ओढ़नी जी,
कान्हा ओडु बार त्यौहार,
बेगा ल्यावों सावरा रे,
आओ कृष्ण मुरार,
भूल्याई मारा कान्हा,
जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी।।

हे काली काली कामनी जी,
लटके घेर घूमेर,
केसरिया सा फुंधा लटके जी,
के चारों मेर,
भूल्याई मारा कान्हा,
जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी।।

मैं जाती की गुजरी कान्हा,
तू जाती को अहीर,
थारो मारो हेत मिल्यो रे,
पूरा जन्म को शिर,
भूल्याई मारा कान्हा,
जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी।।

हे चंद्रसखी री विनती थे,
सुनजो सिरजनहार,
रामफूल गान सुनावे,
थे आओ कृष्ण मुरार,
भूल्याई मारा कान्हा,
जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी।।

भूल आई म्हारा कान्हा,
जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी,
ओढ़नी जी ओढ़नी जी,
ओढ़नी जी कान्हा ओढ़नी,
भूल्याई मारा कान्हा,
जमुना किनारे म्हारी ओढ़नी।।

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