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भजले नाम गुरू का रे मनवा बीत रही है स्वाँसा

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गुरुदेव भजन भजले नाम गुरू का रे मनवा बीत रही है स्वाँसा
तर्ज – रुक जा रात ठहर जा रे चँदा।

भजले नाम गुरू का रे मनवा,
बीत रही है स्वाँसा,
रात गई सुबहा आएगी,
आए न तेरी स्वाँसा।।

करले जतन तू,
भव तरने का,
बीती जाए तेरी जवानी,
स्वाँस आखिरी,
जब आएगी,
पछिताएगा तब तू प्राणी,
भजलें नाम गुरू का रे मनवा,
बीत रही है स्वाँसा।।

आज मिला है,
नर तन तुझको,
शायद फिर ये कल न पाए,
एक एक कर ये,
स्वाँसे बीते,
फिर ये बापस आए न आए,
भजलें नाम गुरू का रे मनवा,
बीत रही है स्वाँसा।।

घरवालो के,
सुख की खातिर,
खो दी है तू ने जिन्दगानी,
अपनी खातिर,
कुछ न किया अब,
क्या ले जाएगा तू प्राणी,
भजलें नाम गुरू का रे मनवा,
बीत रही है स्वाँसा।।

भजले नाम गुरू का रे मनवा,
बीत रही है स्वाँसा,
रात गई सुबहा आएगी,
आए न तेरी स्वाँसा।।

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