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बुढ़ापे बैरी कौण सुणेगा तेरी बात हरियाणवी भजन लिरिक्स

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हरियाणवी भजन बुढ़ापे बैरी कौण सुणेगा तेरी बात हरियाणवी भजन लिरिक्स
गायक – नरेंद्र कौशिक जी।

बुढ़ापे बैरी,
कौण सुणेगा तेरी बात।।

आया बुढ़ापा कान में कह गया,
तीन पते की बात,
मीठा बोलिए ले क चलिए,
लाठी दे दी हाथ,
बुढापे बैरी,
कौण सुणेगा तेरी बात।।

बेटी त घरबार चली जा,
बैटै बहुंआ के हाथ,
खाण पीवण कोण देवेगा,
न्युंए तुड़ाया गात,
बुढापे बैरी,
कौण सुणेगा तेरी बात।।

पायां त चालया ना जाता,
कान सुणे ना बात,
आंख्यां त कम दिखण लागया,
दिन सुझे ना रात,
बुढापे बैरी,
कौण सुणेगा तेरी बात।।

चार जणे तने ले क चालं,
गोसा पुला साथ,
कहत कबीर सुणो भई साधो,
जल बल होगी राख,
बुढापे बैरी,
कौण सुणेगा तेरी बात।।

बुढ़ापे बैरी,
कौण सुणेगा तेरी बात।।

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