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बाबा मुझको ऐसा घर दो जिसमे तुम्हारा मंदिर हो कृष्ण भजन लिरिक्स

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बाबा मुझको ऐसा घर दो,
जिसमे तुम्हारा मंदिर हो,
ज्योत जले दिन रैन तुम्हारी,
तुम मंदिर के अन्दर हो।।

इक कमरा हो जिसमे तुम्हारा,
आसन बाबा सजा रहे,
हर पल हर छिन भक्तो का जहाँ,
आना जान लगा रहे,
छोटे बड़े का उस घर में,
एक समान ही आदर हो,
ज्योत जले दिन रैन तुम्हारी,
तुम मंदिर के अन्दर हो।।

इस दर से कोई भी सवाली,
खाली कभी भी जाए ना,
चैन ना पाऊं तब तक बाबा,
जब तक चैन वो पाए ना,
मुझको दो वरदान दया का,
तुम तो दया के सागर हो,
ज्योत जले दिन रैन तुम्हारी,
तुम मंदिर के अन्दर हो।।

हर प्राणी उस घर का बाबा,
तेरी महिमा गाता रहे,
तू रखे जिस हाल में बाबा,
हर पल शुक्र मनाता रहे,
कभी ना हिम्मत हारे वो तो,
चाहे समय भयंकर हो,
ज्योत जले दिन रैन तुम्हारी,
तुम मंदिर के अन्दर हो।।

बाबा मुझको ऐसा घर दो,
जिसमे तुम्हारा मंदिर हो,
ज्योत जले दिन रैन तुम्हारी,
तुम मंदिर के अन्दर हो।।

1 thought on “बाबा मुझको ऐसा घर दो जिसमे तुम्हारा मंदिर हो कृष्ण भजन लिरिक्स”

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