बाँझन रोती आई तेरे द्वार बालाजी भजन लिरिक्स

हरियाणवी भजन बाँझन रोती आई तेरे द्वार बालाजी भजन लिरिक्स
गायक – नरेन्द्र कौशिक।

बाँझन रोती आई,
तेरे द्वार बालाजी,
मन्नै बेटे की सुणा दे,
किलकार बालाजी।।

तेरे सिवा बाबा मेरा,
दुनिया में कोई ना,
रातुं रोए जाऊँ कदे,
सुख तं भी सोई ना,
सासु के बोलां की,
बुरी मार बालाजी,
मन्नै बेटे की सुणा दे,
किलकार बालाजी।।

खाया नहीं गुंद कदे,
पंजीरी ना खाई हो,
घाल क ना देखी,
मन्नै छठी की भी सयाही हो,
बेटे का ना बैरा,
किसा प्यार बालाजी,
मन्नै बेटे की सुणा दे,
किलकार बालाजी।।

सुसरा और ज्येष्ठ मेरा,
चहावं सं तलाक हो,
झोली करे खड़ी,
बाबा लाज मेरी राख हो,
बांझ कह नणदी,
बार बार बालाजी,
मन्नै बेटे की सुणा दे,
किलकार बालाजी।।

तेरे बिना नहीं स दो,
पांया ने ठिकाणा हो,
दुखिया पुकारः तन्नै,
बाबा होगा आणा हो,
बेटी की तुं सुणले,
पुकार बालाजी,
मन्नै बेटे की सुणा दे,
किलकार बालाजी।।

गुहणिया ने तेरे सिवा,
किसे का भी साहरा ना,
मार मार सिर मरूं,
कोई भी त चारा ना,
अशोक भक्त ने,
ऐतबार बालाजी,
मन्नै बेटे की सुणा दे,
किलकार बालाजी।।

बाँझन रोती आई,
तेरे द्वार बालाजी,
मन्नै बेटे की सुणा दे,
किलकार बालाजी।।

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