नीच नीचता त्यागे कोनी भजन लिरिक्स

नीच नीचता त्यागे कोनी भजन लिरिक्स नीच नीचता त्यागे कोनी भजन nich nichta tyage koni bhajan, anil nagori bhajan

।। दोहा ।।
अभिमानी से जात है , राज तेज और वंश।
तीनो ताला दे गया , रावण कौरव कंश।

नीच नीचता त्यागे कोनी। २
कितना ही सत्कार करो।
काजल नाही सफ़ेद हिए,
चाहे नीच को शीश हजार करो। २

निचे से जड़ काटन आला।
मुख पर मीठी बात करे। २
धोखा देकर गला काट दे।
डाव देखकर घात करे। २

मात पिता से करे लड़ाई।
रोड खड़ा उत्पात करे। २
बिना बुलाये पर घर जाकर।
मुख देखि पंचायत करे। २

बयमानो से बच कर रहना।
कभी नहीं व्यावार करो। २
काजल नाही सफ़ेद हिए,
चाहे नीच को शीश हजार करो। २

अपने आप बड़ाई करके।
असली दोस छिपा लेते। २
दो आने के लालच में पड़ ।
जूठा धर्म उठा लेते। २

मतलब होव जद पेट में पड़कर।
धोका दे धन खा जाते। २
बिना मतलब से मुख नहीं बोले।
अपनी नजर बचा लेते। २

दे विश्वास देगा दे जाते।
कितना चाहे प्यार करू। २
काजल नाही सफ़ेद हिए,
चाहे नीच को शीश हजार करो। २

मन में रखता बेईमानी रे ।
ऊपर बात सफाई की। २
कपट फंद छल धोका देकर।
नाड काट दे भाई की। २

बहन भानजी समझे नाही।
ना ही साख जमाई की। २
मण भर दूध सकती।
एक बून्द खटाई की। २

बाण कुबान दुस्त नहीं भागे।
कितना चाहे प्यार करू। २
काजल नाही सफ़ेद हिए,
चाहे नीच को शीश हजार करो। २

anil nagori ke bhajan

भजन :- नीच नीचता त्यागे कोनी
गायक :- अनिल नागौरी

Leave a Reply