दुनिया उलटी रीत चलावे भजन लिरिक्स

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।। दोहा ।।
कबीर मंदिर लाख का, जडियां हीरे लालि ।
दिवस चारि का पेषणा, बिनस जाएगा कालि ॥

दुनिया उल्टी रीत चलावे।
ज्याने ज़रा सरम नहीं आवे। २


अरे माता जी सु , बेटो मांगे।
ये तो एक बकरा के सागे। २
अपना बेटा ने लाड लड़ावे।
तुजा को मातो काटे। २
दुनिया उल्टी रीत चलावे।
ज्याने ज़रा सरम नहीं आवे। २


अरे पत्थर को नाग बनावे।
ज्याके दूध पतासा चढ़ावे। २
असली साप जद घर में आवे।
वाके होटो पटक मरवावे। २
दुनिया उल्टी रीत चलावे।
ज्याने ज़रा सरम नहीं आवे।


गारा की गणगौर बनावे।
वीके सोळा सिंगार करावे। २
गणगौर कई मुख से बोले।
वीने तालाब माई बदरावे। २
दुनिया उल्टी रीत चलावे।
ज्याने ज़रा सरम नहीं आवे।


माँ बापा से मुख नहीं बोले।
पचे दौड़ गंगा जी में जावे। २
वटे फर फर मातो मुंडावे।
घरे १०० मण शक्कर गलावे। २
दुनिया उल्टी रीत चलावे।
ज्याने ज़रा सरम नहीं आवे


घर की खांड गरकरी लागे।
ग़ुल गाड़िया को मिठो लागे। २
कालूराम जी भजन बनावे।
पछे पोल में ढोल बाजे। २
दुनिया उल्टी रीत चलावे।
ज्याने ज़रा सरम नहीं आवे

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heera lal rao ke bhajan

भजन :- दुनिया उलटी रीत चलावे
गायक :- हीरा लाल राव

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