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थारे खुशी पड़े तो मानजे रे सतगुरु समझावे रे राजस्थानी भजन लिरिक्स

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थारे खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।

दोहा – अमल तंबाकू छुतरा,
सुरा पान सु हैत,
नानक नरका जाएगा,
अपने कुल के समेत।
अमल तंबाकू छुतरा,
उतर जाए प्रभात,
नशा करो श्री राम का,
चड़िया रेवे दिन रात
चाय खागी कालज्यो,
चुस लियो सब खून,
दुखन लागा हाडक्या,
चढ़बा लागी ऊन।
चढ़बा लागी ऊन,
गणी कमजोरी छाई,
रूम रूम में रम गई,
जोर नहीं करें दवाई।
इंदिरा गांधी का राज में,
होटल के लागी लाई,
केवै घनश्याम धनी,
मुश्किल छूटे चाय।

थारे खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे,
सतगुरु समझावे रे,
गुरु ज्ञान बतावे रे,
मन बैठ ज्ञान के गोखडे,
सतगुरु समझावे रे,
थारें खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।।

मन गेले गेले चालनो रे,
उबट मत चाले रे,
उबट चाले कांटो भागे,
ठोकर लागे रे,
मन बैठ ज्ञान के गोखडे,
सतगुरु समझावे रे,
थारें खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।।

डोडी बांधे पागडी रे,
काई छाया निरखे रे,
चार दिना की रूप जवानी,
खाली जासी रे,
मन बैठ ज्ञान के गोखडे,
सतगुरु समझावे रे,
थारें खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।।

पर घर को कहीं बैठणो रे,
कहीं मान घटावे,
मान घटावे आपनो,
नर बात बनावे रे,
मन बैठ ज्ञान के गोखडे,
सतगुरु समझावे रे,
थारें खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।।

पर नारी की दोस्ती रे,
कछु काम न आवे रे,
जोबन खोवे हाथ से,
हियो हाथ न आवे रे,
मन बैठ ज्ञान के गोखडे,
सतगुरु समझावे रे,
थारें खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।।

उसर खेती बावणी रे,
मत बीज गमावे रे,
बीज गमावे गांट को,
कछु हाथ न आवे रे,
मन बैठ ज्ञान के गोखडे,
सतगुरु समझावे रे,
थारें खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।।

गांव खंडेला पालड़ी जी,
खाती बक्सौ जी गावें रे,
छोडा छोले प्रेम का यो,
भजन बनावे रे,
मन बैठ ज्ञान के गोखडे,
सतगुरु समझावे रे,
थारें खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।।

थारें खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे,
सतगुरु समझावे रे,
गुरु ज्ञान बतावे रे,
मन बैठ ज्ञान के गोखडे,
सतगुरु समझावे रे,
थारें खुशी पड़े तो मानजे रे,
सतगुरु समझावे रे।।

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