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तेरे दरबार की चाकरी सबसे बढ़िया है सबसे खरी भजन कृष्ण भजन लिरिक्स

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तेरे दरबार की चाकरी,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी,
तेरे दरबार की चाकरीं,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी।।

जबसे पाई तेरी चाकरी,
दुनिया बदली सांवरिया मेरी,
तुझसा मालिक जहां में नहीं,
जिसको इतनी फिकर हो मेरी,
ऐसी दूजी नहीं,
ऐसी दूजी नहीं नौकरी,
ऐसी दूजी नहीं नौकरी,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी,
तेरे दरबार की चाकरीं,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी।।

मेरी तनख्वाह भी कूछ कम नही,
कूछ मिले ना मिले ग़म नही,
तेरी सेवा बजाता रहूं,
तेरा सेवक कहाता रहूं,
श्याम ये ही तमन्ना मेरी,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी,
तेरे दरबार की चाकरीं,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी।।

एक तेरा सहारा हमें,
एक तेरा ही है आसरा,
तेरी किरपा से जीते है हम,
मेरे मालिक मेरे सांवरा,
भक्त आए है,
भक्त आए शरण मे तेरी,
भक्त आए शरण मे तेरी,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी,
तेरे दरबार की चाकरीं,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी।।

तेरे दरबार की चाकरी,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी,
तेरे दरबार की चाकरीं,
सबसे बढ़िया है सबसे खरी।।

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