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तन में मन में रोम रोम में रहते है श्री राम जी भजन लिरिक्स

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हनुमान भजन तन में मन में रोम रोम में रहते है श्री राम जी…

तन में मन में रोम रोम में,
दोहा – पवन तनय संकट हरण,
मंगल मूरत रूप,
राम लखन सीता सहित,
ह्रदय बसहुँ सुर भूप।

तन में मन में रोम रोम में,
रहते है श्री राम जी, राम जी,
वाह रे वाह हनुमान जी,
वाह रे वाह हनुमान जी।।

श्री रघुवीर के नाम आगे,
त्याग दिए हीरे मोती,
त्याग दिए हीरे मोती,
मेरे मन सिया राम बसे है,
चीर के दिखला दी छाती,
चीर के दिखला दी छाती,
और बोले श्री राम जी, राम जी,
वाह रे वाह हनुमान जी,
वाह रे वाह हनुमान जी।।

रहें हमेशा ब्रह्मचारी और,
सिया राम की भक्ति करें,
सिया राम की भक्ति करें,
करें सहायता दिन दुखी की,
अभिमानी का मान हरे,
अभिमानी का मान हरे,
और हम बोले श्री राम जी, राम जी,
वाह रे वाह हनुमान जी,
वाह रे वाह हनुमान जी।।

यह अनुरोध है रघुवर तुमसे,
आपके दर्शन हो जाए,
आपके दर्शन हो जाए,
पर निंदा को त्याग दे दिल से,
सिया राम कुल बस जाए,
सिया राम कुल बस जाए,
और बोले श्री राम जी, राम जी,
वाह रे वाह हनुमान जी,
वाह रे वाह हनुमान जी।।

तन में मन में रोम रोम में,
रहते है श्री राम जी, राम जी,
वाह रे वाह हनुमान जी,
वाह रे वाह हनुमान जी।।

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