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टूट रही मेरी आस की डोर खाटू श्याम भजन कृष्ण भजन लिरिक्स

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टूट रही मेरी आस की डोर,
कब देखोगे श्याम मेरी ओर,
अपनी दया की एक नजर अब,
कर दो बाबा मेरी ओर,
कब देखोगे श्याम मेरी ओर।।

जीवन नाव मेरी,
फसी है बीच भवर में,
बचा लो मुझको आके,
ले लो अपनी शरण में,
दुखो के घेरे भवर में,
मैं बाबा अटक गया हूँ,
सम्हलो मुझको आके,
मैं रस्ता भटक गया हूँ,
पतवार चलने की ताकत,
अब और नहीं मुझ में,
अब और नहीं मुझ में,
थाम लो बाबा आकर अपने,
थाम लो बाबा आकर अपने,
प्रेमी की ये टूटती डोर,
कब देखोगे श्याम मेरी ओर।।

कहते है लोग तुझको,
तू हारे का सहारा,
पुकारा मैने तुझको,
दिखे क्यों ना किनारा,
मैं दुनिया का सताया,
मुफलिसी का हूँ मारा,
दया करके बाबा,
दे दो थोडा सहारा,
देर तुम्हारी दया की बाबा,
मुझको नहीं मंजूर,
मुझको नहीं मंजूर,
माफ़ करो मेरे श्याम धनि अब,
मुझ बालक का हो जो कसूर,
कब देखोगे श्याम मेरी ओर।।

सुना है मैंने बाबा,
तूने रोतो को हसाया,
ऐसा क्या मैंने किया जो,
मुझे इतना रुलाया,
पाया है उसने सब कुछ,
तेरी चौखट पे आया,
किसी प्रेमी को दर से,
खाली ना लौटाया,
चेतन तेरे दर पे आया,
अर्जी करो मंजूर,
अर्जी करो मंजूर,
गम की आई रात अँधेरी,
कर दो अब खुशियों की भोर,
कब देखोगे श्याम मेरी ओर।।

टूट रही मेरी आस की डोर,
कब देखोगे श्याम मेरी ओर,
अपनी दया की एक नजर अब,
कर दो बाबा मेरी ओर,
कब देखोगे श्याम मेरी ओर।।

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