जंगल विच भैरुनाथ थारो कुण कर गयो श्रृंगार लिरिक्स

जंगल विच भैरुनाथ,
थारो कुण कर गयो श्रृंगार,
कुण थारे काजल लगायो,
कूण लायो प्रसाद,
थारे माली पाना चम-चम चमके,
थारी जय हो भैरुनाथ,
थारी जय हो भैरुनाथ,
जंगल बिच भैरुनाथ,
थारो कुण करगियो श्रृंगार।।

चावल चूरमो और इमरती,
बाबे रे मुख मैं कूण धरगयो,
लाडू पेड़ा री थाली रे बिच में,
रबड़ी रो प्यालो कूण धरगयो,
थारे पुष्पा रा गजरा महके,
थारी जय हो भेरुनाथ,
थारी जय हो भैरुनाथ,
जंगल बिच भैरुनाथ,
थारो कुण करगियो श्रृंगार।।

क्या गर्मी क्या ठंडी बाबो,
बैठो एक ठिकाणे में,
मैं थने पुजू ओ भैरु बाबा,
किन घर हिंडो हिंडायो है,
सब भगतो पे कृपा बरसे,
थारी जय हो भैरुनाथ,
थारी जय हो भैरुनाथ,
जंगल बिच भैरुनाथ,
थारो कुण करगियो श्रृंगार।।

मेहक रयो बाबा थारो मंदिर,
कूण थारे इत्र लगायो है,
भैरु नाथ ने नितरा मनावे,
लाखो लोग बीकाने में,
थारे राजसर ध्वजा फरुखे,
थारी जय हो भैरुनाथ,
थारी जय हो भैरुनाथ,
जंगल बिच भैरुनाथ,
थारो कुण करगियो श्रृंगार।।

जंगल विच भैरुनाथ,
थारो कुण कर गयो श्रृंगार,
कुण थारे काजल लगायो,
कूण लायो प्रसाद,
थारे माली पाना चम-चम चमके,
थारी जय हो भैरुनाथ,
थारी जय हो भैरुनाथ,
जंगल बिच भैरुनाथ,
थारो कुण करगियो श्रृंगार।।

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