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गोविंद की वाणी गीता महारानी महिमा संतों ने जानी

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गोविंद की वाणी गीता महारानी,
महिमा संतों ने जानी।।

इस वाणी में अमृत धारा,
श्री कृष्ण कहे यह बारंबारा,
यह वाणी जगत कल्याणी रे प्राणी,
महिमा संतों ने जानी।
गोविन्द की वाणी गीता महारानी,
महिमा संतों ने जानी।।

सभी शास्त्रों का सार है गीता,
इस आधार से जो भी जीता,
वह पीता है अमृत वाणी रे प्राणी,
महिमा संतों ने जानी।
गोविंद की वाणी गीता महारानी,
महिमा संतों ने जानी।।

गोविंद की वाणी गीता महारानी,
महिमा संतों ने जानी।।

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