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खाटू धाम की माटी म्हारै रास आ गई भजन कृष्ण भजन लिरिक्स

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कण कण में तेरा वास प्रभु
जो करे दुखों का नाश प्रभु
दुनिया भर की खुशियां
मेरे पास आ गई
थारे धाम की माटी
म्हारै रास आ गई
खाटू धाम की माटी
म्हारै रास आ गई
कण कण में तेरा वास प्रभु।।

कोई नहीं दिख्यो अपणो जद
तू ही नजर मनै आयो
खाटू नगरी आ बैठयो
जब मेरो जी घबरायो
पैर धरयो खाटू में
सांस मैं सांस आ गई
थारे धाम की माटी
म्हारै रास आ गई।।

खाटू की माटी का हमने
देखा अजब नजारा
क्या निर्धन क्या सेठ सभी को
इसने पार उतारा
दुनिया सारी करके
ये विश्वास आ गई
थारे धाम की माटी
म्हारै रास आ गई।।

रेत नहीं मामूली ये तो
है संजीवन बूटी
मौज करूं दिन सांवरा
सोऊं तान के खूंटी
होली और दीवाली
बारहों मास आ गई
थारे धाम की माटी
म्हारै रास आ गई।।

तेरी इस पावन मिट्टी में
मैं मिट्टी हो जाऊं
सदा सदा के लिए तेरे
इन चरणों में सो जाऊं
नरसी के होंठो पे इतनी
प्यास आ गई
खाटू धाम की माटी
म्हारै रास आ गई।।

कण कण में तेरा वास प्रभु
जो करे दुखों का नाश प्रभु
दुनिया भर की खुशियां
मेरे पास आ गई
थारे धाम की माटी
म्हारै रास आ गई
खाटू धाम की माटी
म्हारै रास आ गई
कण कण में तेरा वास प्रभु।।

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