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कोए दे स बोल मन्नै री जब आधी रात ढले काली

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हरियाणवी भजन कोए दे स बोल मन्नै री जब आधी रात ढले काली
गायक – नरेंद्र कौशिक जी। राकेश कुमार जी। खरक जाटान (रोहतक)

कोए दे स बोल मन्नै री,
जब आधी रात ढले काली।।

मेरे ना की घाल घालदी,
अंबर में आग बालदी,
तेरा ले क नाम चालती,
या क्युकर ढली ढले काली,
कोई दे स बोल मन्नै री,
जब आधी रात ढले काली।।

एक बलः गगन में हांडी,
सेवड़े ने चिती मांडी,
महारः खड़ी बगड़ में जांडी,
उकी फुंगल आप जले काली,
कोई दे स बोल मन्नै री,
जब आधी रात ढले काली।।

मन्नै ढाई घड़ी सं टाली,
इब आगे तुहे रूखाली,
दया करीयो खपर आली,
या दुनिया हाथ मले काली,
कोई दे स बोल मन्नै री,
जब आधी रात ढले काली।।

अशोक भक्त में खेली,
तन्नै दया राज की ले ली,
या रामभजन की चैली,
तेरा लावण भोग चले काली,
कोई दे स बोल मन्नै री,
जब आधी रात ढले काली।।

कोए दे स बोल मन्नै री,
जब आधी रात ढले काली।।

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