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किने सुनाऊं मन की बाता कोई ना श्याम हमारो है कृष्ण भजन लिरिक्स

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किने सुनाऊं मन की बाता,
कोई ना श्याम हमारो है,
तू भी रुस्यो बैठो है बाबा,
आखड़ली भर आवे है,
किने सुनाऊ मन की बाता,
कोई ना श्याम हमारो है।।

जग झूठो सब रिश्तो झूठो,
तू ही सच्चो साथी है,
कईया मनाऊं थाने बाबा,
सेवकियो तो अनाड़ी है,
जोर ना चाले म्हारो था पर,
तु तो लखदातारी है,
किने सुनाऊ मन की बाता,
कोई ना श्याम हमारो है।।

रोता रोता थक गया बाबा,
अब ना म्हारे समायी है,
जो बाता थी दिल में म्हारे,
अब होठा पे आई है,
करदे कृपा ठाकुर ईब तो बस,
म्हारे से के लड़ाई है,
किने सुनाऊ मन की बाता,
कोई ना श्याम हमारो है।।

म्हारे से नेह लगा के रसिया,
क्यों छोड़ो मजधार है,
थारे बिना म्हारी कौन सुनेगो,
तू मेरो आधार है,
मनडो म्हारो सुनो डोले,
थारे मिलन की आस है,
किने सुनाऊ मन की बाता,
कोई ना श्याम हमारो है।।

थारे रूस्या कईया सरसी,
थे प्राणों से प्यारा हो,
गलती का पुतला हा बाबा,
फिर भी बालक थारा हो,
डिम्पी तेरो कुछ ना चाहवे,
बस चरणों में ध्यान रहवे,
किने सुनाऊ मन की बाता,
कोई ना श्याम हमारो है।।

किने सुनाऊं मन की बाता,
कोई ना श्याम हमारो है,
तू भी रुस्यो बैठो है बाबा,
आखड़ली भर आवे है,
किने सुनाऊ मन की बाता,
कोई ना श्याम हमारो है।।

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