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कहाँ छुप गया तू कहाँ तुझको ढूँढू ओ मेरे मन के मीत कृष्ण भजन लिरिक्स

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कहाँ छुप गया तू
कहाँ तुझको ढूँढू
ओ मेरे मन के मीत
ओ मेरे मन के मीत
मन वीणा की
टूटी है तारे
बिखरा मेरा संगीत
ओ मेरे मन के मीत
ओ मेरे मन के मीत।।

क्या थी वो रात
जिन रातो में
गीत तुम्हारे गाये थे
सात सुरो की
खुशबू से उन
गीतों को महकाये थे
ना जी सकूँगा
ना मर सकूँगा
मेरी रह गई
अधूरी रीत
ओ मेरे मन के मीत
ओ मेरे मन के मीत।।

चुन चुन भावों की
कलियों से
तुझको कभी सजाया
बिन बोले ही प्रीतम प्यार
कभी दिल का दर्द सुनाया
घुटने लगा है
दम प्राणों का
ये स्वासे रह जाये बीत
ओ मेरे मन के मीत
ओ मेरे मन के मीत।।

गम देने वाले
दर्द ये दिल का
मुश्किल हुआ अब सहना
दिल की दिल में रह गई मेरे
अब तुमसे नहीं कुछ कहना
देखेगी दुनिया
मोहब्बत तरुण की
भारी आ गई जीत
ओ मेरे मन के मीत
ओ मेरे मन के मीत।।

कहाँ छुप गया तू
कहाँ तुझको ढूँढू
ओ मेरे मन के मीत
ओ मेरे मन के मीत
मन वीणा की
टूटी है तारे
बिखरा मेरा संगीत
ओ मेरे मन के मीत
ओ मेरे मन के मीत।।

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