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ओ सांवरे शरण में आई जगत से हार के कृष्ण भजन लिरिक्स

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ओ सांवरे शरण में आई,
जगत से हार के,
शरण में आईं,
जो भी जग से हारा,
दिया तूने सहारा,
सुनकर के मैं भी आई,
शरण में आईं,
जगत से हार के,
शरण में आईं,
ओ सांवरे शरण में आईं,
जगत से हार के।।

अपनों ने अपना बनकर लुटा,
अपनों ने अपना बनकर लुटा,
सारा जगत अब लागे है झूठा,
फिरूं मैं तो मारी मारी,
समझो ना लाचारी,
तेरी दुनिया रास ना आई,
शरण में आईं,
जगत से हार के,
शरण में आईं,
ओ सांवरे शरण में आईं,
जगत से हार के।।

राधा जैसी शक्ति नहीं है,
राधा जैसी शक्ति नहीं है,
मीरा जैसी भक्ति नहीं है,
कैसे तुझको रिझाऊं,
कैसे तुझको मनाऊं,
असुवन की झड़ी लगाई,
शरण में आईं,
जगत से हार के,
शरण में आईं,
ओ सांवरे शरण में आईं,
जगत से हार के।।

निर्बल का बल तुम कहलाते,
निर्बल का बल तुम कहलाते,
शरणागत की लाज बचाते,
मुझे गले लगा ले,
मुझे अपना बना ले,
ये श्याम ने अर्जी लगाई,

शरण में आईं,
जगत से हार के,
शरण में आईं,
ओ सांवरे शरण में आईं,
जगत से हार के।।

ओ सांवरे शरण में आई,
जगत से हार के,
शरण में आईं,
जो भी जग से हारा,
दिया तूने सहारा,
सुनकर के मैं भी आई,
शरण में आईं,
जगत से हार के,
शरण में आईं,
ओ सांवरे शरण में आईं,
जगत से हार के।।

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