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ओ मन बड़ो जबर रेे संता भजन राजस्थानी भजन लिरिक्स

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ओ मन बड़ो जबर रेे संता,
जिनके काम पड़े इन मन से,
वाको पूरी खबर रे संता,
ओ मन बड़ों जबर रे।।

ओ मन मारो उड़ आकाशा,
बिना फाख बिना पर र संता,
लाख कोस की सूरत लगावे,
सांधे पाल अधर र संता,
ओ मन बड़ों जबर रे।।

ओ मन मारो माया संग डोले,
फीरथो फिर घर घर र संता,
सो वर्षा को नियम लगावे,
पथो नी चले पल र संता,
ओ मन बड़ों जबर रे।।

सब दुनिया न नाच नचाव,
सब के गाली तर र,
ज्ञानीध्यानी मिल पकड़ पचाटियो,
कर दिनू सिधो सर र संता,
ओ मन बड़ों जबर रे।।

मन न मार सूरथा न डा टे,
वहीं पूरा फखद र संता,
केव कबीर सुनो भाई साधो,
पवोला निज घर र संता,
ओ मन बड़ों जबर रे।।

ओ मन बड़ो जबर रेे संता,
जिनके काम पड़े इन मन से,
वाको पूरी खबर रे संता,
ओ मन बड़ों जबर रे।।

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