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एक बार तो मोहन आजा रे मिलने के लिए मन तरसे है फ़िल्मी तर्ज भजन लिरिक्स

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एक बार तो मोहन आजा रे,
मिलने के लिए मन तरसे है,
मिलने के लिए मन तरसे है,
बतिया के लिए मन तरसे है।।

-तर्ज- – दिल लुटने वाले जादूगर।

भावा को भूखो श्याम मेरो,
आंसू यो देख ना पावे है,
कोई मोल नहीं इनको प्यारो,
यो तो भावा पर बिक जावे है,
दो असुवन की धारा पर यो,
मेरे श्याम धणी रिझ जावे,
इक बार तो मोहन आजा रे,
मिलने के लिए मन तरसे है।।

तेरो दरबार ओ सांवरिया,
लागे हम सब ने घनो प्यारो है,
तेरी मोहनी सूरत से सारे,
जग में छायो उजियारो है,
तू जान से लागे प्यारो है,
क्यूंकि तू हारे को सहारो है,
इक बार तो मोहन आजा रे,
मिलने के लिए मन तरसे है।।

‘सुरेश’ को दिल हर्षायो है,
बाबा रो संदेशो आयो ह।
मैं आऊंगा तुझसे मिलमें,
म्हा पर कृपा बरसायो है,
सब मिलकर खूब रिझाओ जी,
थारा बिगड़ा काम बनावे है,

इक बार तो मोहन आजा रे,
मिलने के लिए मन तरसे है।।

एक बार तो मोहन आजा रे,
मिलने के लिए मन तरसे है,
मिलने के लिए मन तरसे है,
बतिया के लिए मन तरसे है।।

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