Skip to content

उगिच का कांता,Ugich Ka Kanta

  • by
fb-site

उगिच का कांता गांजिता दासी दीना ॥

व्यापुनिया सारी धरणी । मूर्ति आपुली या नयनी
खेळते पहा दिनरजनी । तेवि हृदय मंचकि लीना ॥

Leave a Reply

Your email address will not be published.