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आदअन्त करूं थांकी सिवरणा मारा खोलो गिगन घर ताला

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आदअन्त करूं थांकी सिवरणा,
जूगा-जूंगा आपकी सिवरणा,
मारा खोलो गिगन घर ताला,
गणपत देव बड़ा मतवाला।।

आपने सिवंरिया अगम की सुजे,
सुद्धबुद्ध देबा वाला,
शंकर जी का लाल कुवाया,
पार्वती जी का बाला।।

प्रथम नमन करूं आपने,
कांटों करमां का जाला,
सिर पर हाथ धरो मेरे दाता,
रिद्धि-सिद्धि देबा वाला।।

चार जूगां में अगम पुजाया,
जागिया गुरूजी का बाला,
जाणिया जो तो करणी करग्या,
जाके घट में होग्या ऊजाला।।

पदमगुरूजी परवाणी मिलिया,
लाडूरामजी का बाला,
गुर्जर गरीबीऊं कनीरामजी बोले,
गांव गोरख्या वाला।।

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