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अरे महीमा अपरम्पार आपरी शाँन्तिनाथजी महाराज भजन

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अरे महीमा अपरम्पार आपरी,
लीला अपरम्पार,
म्हारा नाथजी ओ,
राज री लीला अपरम्पार,
म्हारा पीरजी ओ,
राज री महीमा अपरम्पार,
महीमा अपरम्पार,
आपरी लीला अपरम्पार पार,
महीमा अपरम्पार पार,
राज री लीला अपरम्पार,
म्हारा नाथजी ओ,
राज री महीमा अपरम्पार,
म्हारा पीरजी ओ राज री,
लीला अपरम्पार पार।।

अरे रावतसिंहजी जोरावत घर,
शिवगण जामो पायो,
माघ अन्धारी पोचम ने,
गुरु भागली धरण घर आया,
सवंत१९९६रेवत भागली हरसाया,
भागली हरसाया गुरुवर,
भागली हरसाया,
हर घर गुल री थलिया वाटे,
हो….ओ…हो..
हर घर गुल री थलिया वाटे,
गावे मंगला चार,
म्हारा नाथजी ओ,
राज री महीमा अपरम्पार,
म्हारा पीरजी ओ राज री,
लीला अपरम्पार पार।।

अरे जुना टीपणा जोसी जोया,
ओटु नाम धराया,
पीठाधिस रो पद पावेला,
असरज बात बतासा,
शिवरुपी भल संत बणेला,
आगम वात बताया,
आगम वात बताया,
जोसीजी आगम बात बताया,
दुनियां मे असरज काम करेला,
अरे दुनियां असरज काम करेला,
ओ…हो…ओ..,
अरे दुनियां में, असरज काम करेला,
समझो बात रो सार,
म्हारा नाथजी ओ,
राज री महीमा अपरम्पार,
म्हारा पीरजी ओ राज री,
लीला अपरम्पार पार।।

अरे बालक मे संत रुप देख,
थने गुरु चरणे दे आया,
अरे केशरनाथजी रे चरणे,
चढाया अरपण कर ने आया,
पुरव जनम रो लेख ने,
सतगुरजी अपनाया,
सतगुरुजी अपनाया,
आपने सतगुरुजी अपनाया,
म्हारा नाथजी ओ,
राज री महीमा अपरम्पार,
म्हारा पीरजी ओ राज री,
लीला अपरम्पार पार।।

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